आज फिर ऊडने को दिल कहता है ,
नयी उमीदों कि दुनिया को वुनने को दिल कहता है ,
आज फिर ऊडने को दिल केहता है !
ना जाने कितने सपने को सकारना,
चाहे ये दिल।
ना जाने कितने अरमानों को सवारना ,
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| photo taken by samsung mobile @ arnala |
चाहे ये दिल !
आज फिर ऊडने को दिल केहता है ,
नयी उमीदों कि दुनिया को वुनने को दिल कहता है ,
आज फिर ऊडने को दिल केहता है !
" मैं तो आज भी वही हूँ ,
फिर क्यों सब बदला बदला सा लगता है !
मंजिल को पाते ही,
क्यों आज अलग सा प्रतीत होता है !
योंह तो आशू मैंने ,
यू हि बहुत से बहाए ,
पर क्यों आज यह आशू
मीठा सा लगता है !
अरमानो को पूरा होता देख,
आज फिर ऊडने को दिल केहता है "!!

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