Saturday, 20 October 2012

Aaj Phir Udane Ko Dil Kehta Hai

  आज फिर ऊडने  को दिल  कहता है ,
नयी उमीदों  कि दुनिया को  वुनने  को दिल कहता है ,
आज फिर ऊडने  को दिल केहता है !
                        ना  जाने  कितने सपने को सकारना,
                         चाहे  ये  दिल।
                        ना जाने कितने अरमानों  को सवारना ,
  photo taken by samsung mobile @ arnala
                        चाहे ये  दिल !

आज फिर ऊडने  को दिल केहता है ,
नयी उमीदों  कि दुनिया को वुनने को दिल कहता है ,
आज फिर ऊडने  को दिल केहता है !

  "  मैं  तो आज भी वही हूँ ,
    फिर क्यों सब बदला बदला सा लगता है !
    मंजिल को पाते  ही,
    क्यों  आज अलग सा प्रतीत होता है !
     योंह  तो आशू  मैंने ,
     यू हि बहुत से बहाए ,
     पर क्यों आज यह आशू
     मीठा सा लगता है ! 

अरमानो को  पूरा होता देख,
आज फिर ऊडने  को दिल केहता है "!!

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